जन्मना जायते शूद्रः संस्काराद् द्विज उच्यते।

पतंजलि गुरुकुलम् की स्थापना का उद्देश्य धन अर्जित करना नहीं अपितु भारत को मैकाले की दोषपूर्ण शिक्षा पद्धति के षड्यंत्र से मुक्त कर वैदिक एवं ऋषि ज्ञान परंपरा की प्रतिष्ठा करना है। पतंजलि गुरुकुलम् में एक ओर जहाँ आधुनिकतम शिक्षा प्राप्त होती हैं। वहीं दूसरी ओर संस्कारों के द्वारा उनमें श्रेष्ठतम नेतृत्व भी पैदा होता हैं।

 

बच्चे किसी भी देश का भविष्य होते हैं तथा माता-पिता की आशाओं और सपनों के केन्द्र होते हैं। हर एक माता-पिता अपने बच्चों को दुनिया में सबसे ऊँचाई पर देखना चाहते हैं। माता-पिता बच्चों को दुनिया की सबसे श्रेष्ठ शिक्षा देने के साथ-साथ उनको श्रेष्ठतम संस्कार भी देना चाहते हैं। भारत की सनातन आर्ष शिक्षा परम्परा में शिक्षा एवं संस्कारों का श्रेष्ठतम दिव्य समन्वय था। उसी सनातन आर्ष ज्ञान परम्परा एवं आधुनिक शिक्षा व्यवस्था का दिव्य संगम है । पतंजलि गुरुकुलम् ।।

पतंजलि गुरुकुलम् कि उपादेयता: पूर्ण जागृत, समर्थ, विकसित एवं पूर्ण प्रकाशित आत्माएँ तैयार करना 

1. वैदिक विद्वान् – व्याकरण, दर्शन, उपनिषद्, वेद, वैदिक साहित्य, भारतीय प्रामाणिक इतिहास एवं राजधर्म आदि विषयों के सन्दर्भ में प्रामाणिक विद्वान् तैयार हों तथा सामाजिक आध्यात्मिक, आर्थिक, वैज्ञानिक व राजनैतिक दृष्टि से एक आदर्श नेतृत्व देने की क्षमता रखने वाले स्नातक विद्यार्थी तैयार हों।

2. दिव्य व्यक्तित्व युक्त नेतृत्व – योग से लेकर उद्योग तक सभी क्षेत्रों में आदर्श नेतृत्व देेने कि क्षमता देने वाले स्नातक तैयार करना।

एक मानव के अन्दर महामानव छिपा होता है किन्तु उसे उजागर करने के लिऐ श्रेष्ठ वातावरण, पुरुषार्थ, प्रशिक्षक व प्रशिक्षण कि आवश्यकता होती है।

वह पतंजलि गुरुकुल के द्वारा प्रदान किया जाता है।

 

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ई-मेल  – yoggram@patanjaligurukulam.org

फोन    –  +919068565307, +917302745112,

 

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